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पाखण्ड हुआ खण्ड-खण्ड

रचयिता- नमन जैन अद्वितीय, शामली (उ० प्र०)

हुआ पतन है संस्कारों का क्रोध बहुत अब आता है।
पाखण्डी को देख देख कर धर...

August 30, 2017

मेरी भी अरदास अलग है

मेरी भी अरदास अलग है
दोनों का एहसास अलग है,
तेरी-मेरी प्यास अलग है।
तू अजीज है रब का, लेकिन
मेर...

July 4, 2017

गोरी तुम्हरे चक्कर में

 

मन मिसरी, मतवाली भे गई, गोरी तुम्हरे चक्कर में।
घर थाना, कोतवाली भे गई, गोरी तुम्हरे चक्कर में।

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April 4, 2017