अपनी आँखों में मेरी बसावट रखो

अपनी आँखों में मेरी बसावट रखो,
तेरी पलकों में रहके सँवर जाऊँगा।
तेरी नज़रें झुकीं, सांस थम सी गई,
फेरी नज़रें जो तुमने तो मर जाऊँगा।

तेरी मदमस्त फलती जवानी में हूँ,
तेरी आँखों के नमकीन पानी मे हूँ।
भींगे न नैन तेरे सम्हालो इन्हें,
आँसुओं में ढुलक के उतर जाऊँगा।
फेरी नज़रें जो …………. ।।

हुस्न का वो हरापन, अदा चंचली,
और कलाई में सोने की सरसों-फली।
तेरी जुल्फों से छूकर हवा जो चली,
मैं महक बनके गुल में पसर जाऊँगा।
फेरी नज़रें जो ……….।।

तेरे कंगन में हूँ, उनकी खन-खन में हूँ,
बनके पायल तेरी, प्रीत-वंदन में हूँ।
ऐसे यूँ जोर से पग न झटको प्रिय,
घुँघरुओं जैसे खुल के बिखर जाऊँगा।
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~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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