अभी आप ऐसे सताओ नहीं

भुजंगी छंद

अभी आप ऐसे सताओ नहीं|
मुझे छोड़ के दूर जाओ नहीं||
कभी दूर होना नहीं आप से|
बचाना मुझे आप ही पाप से||

चलो साथ मेरे रहो साथ में|
लकीरें बनो आ सदा हाथ में||
नहीं आप सा है जहाँ में अभी|
कभी नाम लेंगे जहाँ में सभी||

~दिलीप कुमार पाठक “सरस”

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