आई लभ यू बोल गई

अइसे प्यार से सुसरी हमको,
आई लभ यू बोल गई।
बरसों से थी ढुनमुन-ढुनमुन,
दिल की हँड़िया डोल गई।

हम तो धरे रहे सीना पर…
हाथ, कि हार्ट-आटैक ना हो,
अइसे फिसल पड़े कि जइसे,
गोर के निच्चे ट्रैक ना हो।

कन्धा पकड़ संभाली हमको,
नस का नाड़ा खोल गई।
अइसे प्यार से सुसरी हमको,
आई लभ यू बोल गई।

अइसन मुस्काहट थी ओहकी,
हमरा भेजा सरक गया।
मुंह का फाटक लॉक रहा, पर
दिल का खिड़की खड़क गया।

हम केतने पानी में हैं, उह
लइकी हमको तौल गई।
अइसे प्यार से सुसरी हमको,
आई लभ यू बोल गई।

बिना पिए ही चढ़ गई हमको,
दू-हांडी झरखंडी जी,
कउनो बढ़िया लगन देख के,
ब्याह करा द पंडी जी।

घर में घुसकर गजब प्रीत की,
कुतिया हमको झोल गई।
अइसे प्यार से सुसरी हमको,
आई लभ यू बोल गई।

अपने प्यार से जउरी से,
ऊ रिश्ता अइसन जोड़ गया।
उसकी बातों का टेकुआ,
जब अंदर तक हिलकोड़ गया।

जने-जने परपरा रहा था,
हुआँ लगा बरनोल गई।
अइसे प्यार से सुसरी हमको,
आई लभ यू बोल गई।


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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