आवाज तो दिया होता

जानने को मेरे दर्द का रिश्ता,
तुमने दर्द महसूस किया होता,
हर सुबह की आस को फिर,
शाम तन्हाई को भी छुआ होता,
एक पल के खातिर ही सही,
देख के नमी,आँखो को चुमा होता,
जिंदा रहते एहसास मेरे और,
तू रूह की सांसे में धडका होता,
खामोशी के जज्बात देख के,,
मेरा गीत तूने ही कोई गाया होता,
निभाती रिश्ते को हर मोड पर,
एक बार तूने आवाज तो दिया होता,
कारवाँ में थे सभी साथ तेरे,
“अनीता” को भी अपना बनाया होता !


अनीता मिश्रा “”सिद्धी””

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