उनके पास एंड्राइड है

लाइफ के ओश्यन पर भैया, आती रहती टाइड हैं,
मौन ही रहने लगे आजकल, हम भी सैटिसफाइड हैं।

फेस टिकाये फेसबुक पर, रहने लगे वो साइड हैं,
हों भी क्यों न भैया, अब तो, उनके पास एंड्राइड है।

बस अपनी ही गेंद हमेशा, फेंकी जाती वाइड है,
अपना कहना लाईड है, और उनका बोना-फाइड है।

जीभ निकाली, फोटो डाली, इतनी शक्लें ट्राइड हैं,
भोंदू का भौकाल देखकर, भेजा अपना फ्राइड है।

अब तो उनके व्हाट्सएप का, लास्ट सीन भी हाईड है।
हों भी क्यों न भैया, अब तो, उनके पास एंड्राइड है।

टच में नहीं किसी के भैया, टच-स्क्रीन के फेरे में,
छोडो अब क्यों छेड़ें उनको? पड़ता कौन बखेड़े में?

हम तो निकल गए बतियाते, करते तेरे मेरे में,
वो मोबाइल पर आँख गड़ाए, रहे घूमते घेरे में।

हाँ जी! उनका जी. पी. एस. ही, करता उनको गाइड है,
हों भी क्यों न भैया, अब तो, उनके पास एंड्राइड है।

टिक-टिक करके रोज बितायीं, राते याद नहीं रहतीं।
बत्तीस जी.बी. की मेमोरी, बातें याद नहीं रहतीं।

ऐसे में कुछ भी मांगो, तो हाँ में सिर हिल जाता है,
अनजाने में दी कितनी, सौगातें याद नहीं रहतीं।

इसीलिये तो हमको भी अब, होता उनपर प्राइड है,
हों भी क्यों न भैया, अब तो, उनके पास एंड्राइड है।


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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