उसी का लोटा उसी की थाली

करुण~
आँखों में आँसू हैं, होंठों पे सिसकी है|
हृदय हौला गयी जो , यह पीड़ा किसकी है||

वीर~
हवाओं से मत कहना कि ठहर जाओ|
हिम्मत है तो तूफानों से आ, हाथ मिलाओ||

हास्य~
गंजी कैसे हो गयी?सब कुछ दई बताय|
सिर पै हाथ फिराय के, गंजा कहे सुनाय||

शान्त~
संत शान्त-मन लीन है |
उसकी लीला बड़ी निराली|
निर्वेद उसी का पुत्र है|
उसी का लोटा उसी की थाली||

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दिलीप कुमार पाठक सरस

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