चमत्कार हो गया (2)

हौसले बुलंद हैं बुलंदशहर के।
जी रही हैं बेटियां हर रोज हहर के।
किस घड़ी में टूट पड़ें दूत कहर के।
कौन निगहबान बने चार पहर के।

अजी घर में ही बेटी का बलात्कार हो गया।
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया।

~~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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