चमत्कार हो गया

बाइस बरस का बेटा समझदार हो गया,
बावन बरस का बापू गँवार हो गया,
हर थ्योरी, तर्क उनका बेकार हो गया,
लॉजिक में बच्चों से भी लाचार हो गया!

अब जींस देखो कूल्हों के पार हो गया,
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

आँखों से शर्म गायब, वो फ्रैंक हो गये,
हम देशी कट्टा थे बस, वो टैंक हो गये,
वो ब्लैकबेरी, एप्पल, समसैंग हो गये,
हम नोकिया के जैसे फिर हैंग हो गये!

उनकी कनेक्टिविटी का विस्तार हो गया!
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

जिनको था होना “अंदर”, सत्ता चला रहे,
बस तोंद वालों को ही भत्ता खिला रहे,
मुर्गा धँसड़ रहे हैं, वो एसी में बैठे,
और अन्नदाता अपने, पत्ता हिला रहे!

देखो गली का गुंडा सूबेदार हो गया!
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

हर शाख पर है उल्लू, सत्ता में लोमड़ी!
जनता की मुसीबत की, किसको यहाँ पड़ी,
बस वादों की झड़ी औ बातें बड़ी बड़ी!
हर पाँच साल पर है जनता ठगी खड़ी,

तथाकथित मसीहा, मक्कार हो गया
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

यह कूल ड्यूड साले, डूबेंगे किसी दिन,
न जीते एक दिन, पिज्जा धँसाये बिन,
न इनसे देश का है, भविष्य भी मुमकिन,
ये घर की बस “लता” हैं, अहाते के “सचिन”!

पीएचडी पासआउट “गद्दार” हो गया,
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

देखो बिना स्टेयरिंग, गाड़ी है चल पड़ी,
बातें भी अपनी सुनकर बेगम उछल पड़ीं!
कह दिया जलपरी तो ऐसे मचल पड़ी,
थोड़ी है हड़बड़ी पर, अपनी निकल पड़ी!

अजी देखते ही अपना भी उद्धार हो गया,
मेरे देश में ए भाई चमत्कार हो गया!

…………..
क्रमश:….


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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