ठान लिया है

भारत मां का आंचल ना अब दागदार करेंगे
ठान लिया है एक बार उल्झो
हम घायल हजार करेंगे
मेरे सोने की धरती को आंतक से कोयला किया,
मिले जो आजादी हमे
नामो-निशां ही मिटा दे,
है खून अभी भी रगो मे “”भगत,कुंवर,मंगल “”का

जोश अभी भी जुनून बनके सर बोल रहा ,पर तुझ सा बेहोश नहीं
गद्दार तू क्या टिकेगा तेरा सौ आंतकी एक नारी ही काफ़ी है मारने के लिये,
स्वर्ग मेरा कश्मीर तू अपने ही नरक मे मरेगा ,

लाख लश्कर ले आ एक जवान सीमा पर हर को भुनेगा

तिरंगा मेरी मां का आंचल हर समय अमन-चैन से उडेगा
हमने ही तुझे बनाया,मिटाने की ताकत रखते है,
सीने मे प्यार है तो आंतको के लिये खंजर रखते है

जो आंतक का साथी है अब वो ना बचेगा,
मेरे ही घर मे अब ना “सियासी” शतरंज बिछेगा

संभल जा ये देश के दुशमन इस बार जो जंग हुयी तो तू हर हाल मे मरेगा ,
हर एक बाला चिंगारी हैं
इस बार “ये आंतकी” तेरी ही बारी है
हवन करेंगे तेरे खुन से ,देश को “मोक्ष” दिलायेन्गे
देखना एक दिन धरा को प्यार का स्वर्ग बनायेंगे!!


~अनीता मिश्रा “सिद्धि””

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