तू जींस न पहनो मेरी माँ

तू जींस न पहनो मेरी माॅ
क्यूँकि………..

मिल न पाती तेरी आँचल की छाया
सूर्य जलाता मुझको माॅ
तेरे आँचल में छिपकर मैं
संसार देखता हूॅ तूझमें माॅ

तू जींस न पहनो मेरी माॅ
क्यूँकि………..

तेरे आँचल में प्यार भरा
हैं सुख का शैलाब भरा
तेरे आँचल की छाया पाकर
हो जाता धन्य तेरा बेटा माॅ

तू जींस न पहनो मेरी माॅ
क्यूँकि………..

तेरे आँचल की खुश्बू ऐसी
जो हैं दूर्लभ दुनिया में माॅ
मेरे पास इतनी शब्द कहाॅ
जिससे बखान करूं मैं तेरी माॅ

तू जींस न पहनो मेरी माॅ

शशि रंजन शर्मा”मुन्टुन”✍

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