तेरे हिस्से की रोटी

तुम याद आते हो बेटे!!
मै जानती हुं,
तू कभी मुझे याद नही करेगा,
मस्त अपनी दुनिया मे रहेगा,
पर वो तेरी नटखट हंसी,
गले मे बाहे डालकर झुलना,
याद आता है,
तेरी तस्वीर देखकर!!
माँ हुं तेरी,
लहु से सींचा है तुझे,
दूर हो कर भी पास हो मेरे,
कभी तन्हाई मे भी तू,
अलग मुझसे नही होता,
बचपन-जवानी के तेरे खिलौने,
साथ है मेरे!!
वो तेरा टुटा हुआ बल्ला,
वो गेन्द, वो किताबे,
वो कपडे तेरे,
हर चिजो मे,
अक्स तेरा ही दिखता है!!
क्या बेटा,
मै भी याद आती हुं तुझे ?
मेरा चेहरा,
अब भर गया है झुरियों से,
तु आंखो मे बसा रहता है!!
अभी भी,
तेरे हिस्से की रोटी मैं बनाती हुं,
तस्वीर को खिला कर ,
खुद खाती हुं!!
इस आस मे बैठी हुं,
दुर है तो क्या,
कभी तो तुम आओगे,
उम्मीद का चिराग ना बुझने दूंगी,
अटकी रहेगी सांसे,
तेरे आने तक!!
मेरे दुध का कर्ज चुकाओगे !!


अनिता मिश्रा”” सिद्धी””

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