दीपावली

ज्ञान की ज्योति जगा दो
आज भारत देश में ।
तम रहे न तनिक भी
न कोई हो क्लेश में ।।

तमसो मा ज्योतिर्गमय को
सार्थक कर दो प्रभो ।
इस प्रकाशोत्सव में उत्सव
व्याप्त हो चहुँ दिशि विभो ।।

सब जनों को बोध हो
पर्व के संदेश से
हों सदाचारा सभी जन
वेद के आदेश से ।।

ऋषि दयानंद दीप बनकर
जग रहे हैं आज भी
पा रहा है वेद का
आलोक अखिल समाज भी ।।

आज ऋषि निर्वाण दिन पर
सब तरफ आलोक हो ।
अज्ञान तम का नाश हो
अरु न किसी को शोक हो ।।

राज हो उल्लास का वा
ज्ञान के प्रकाश ।
वीर सारे कर रहे हैं
यत्न पूर्ण विकास का ।।


~राज वीर सिंह ‘मंत्र’

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