दैनिक श्रेष्ठ रचना दिनांक 21.02.2018 (नीतेंद्र सिंह परमार)

*मातृभाषा*

मातृभाषा जान हैं सारा जहान हैं जातीयता ईमान हैं।

मातृभाषा गान हैं शौर्यता पहचान हैं जीवन में महान हैं।।

मातृभाषा प्रान हैं बुद्धिमान ज्ञान हैं शत्रु को कृपान हैं।

मातृभाषा मान हैं अम्रत रस पान हैं सारा हिन्दुस्तान हैं।।

मातृभाषा राष्ट्रगीत हैं प्रेम परम प्रीत है समय पावन पुनीत हैं।

नीतेन्द्र सिंह परमार ” भारत “
छतरपुर ( मध्यप्रदेश )

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