नारी

आप सब लो ये जान ,देव करे गुणगान,
है नर से निपुंड वो,नाम बस नारी है ।

रण कौशल कमाल,मारे बन कर काल,
जैसे हो रणचंडी वो,सब पर भारी है ।

रूप धर विकराल,किये असुर हलाल,
घोर संकट से देख,बहार निकारी है ।

भूला कैसे तू नादान,कर इसका सम्मान,
यही नारीे ही तो भव,के पार उतारी है ।।


~नवीन श्रोत्रिय”उत्कर्ष”

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