नेक सलाह

झूठ बोल छल रहे,झूठ से ही चल रहे,
झूठ की इस झूठ को,दिल से निकालिए ।

झूठे रिश्ते झूठा जग,झूठन ही यहाँ सग,
झूठे इस प्रपंच में,न खुद को डालिए ।

भरी यहाँ मोह माया,संभल न मन पाया,
भ्रम से निकाल अब,मन को संभालिए ।

तारना है खुद को तो नेक राह चल फिर,
प्रेम गीत गा गा अब,मन सच पालिए ।।


~नवीन श्रोत्रिय”उत्कर्ष”

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