नोटबंदी पर मन की बात

असहिष्णुता की आंच है सुलगी, घी डलवाने आया हूँ।
मोदी जी मैं तुमसे, मन की बात सुनाने आया हूँ।

जो बैठे थे मार कुंडली, हरे गुलाबी नोटों पर,
गिद्धों जैसी नज़रें थी, जिनकी बिक जाते वोटों पर।

काले धंधे फलते थे जिन उजले कुर्ते वालों के।
नशा….उतारे जो न उतरे, सत्तासीन दलालों के।

नोटबंदी का खट्टा नींबू, तुमने वहाँ निचोड़ दिया।
दो-हज़ार की ईंट मारकर, उनका गुल्लक फोड़ दिया।

हम लाइन में लगे रहे और उन्हें पसीने आते थे।
गड्डी पर सोने वाले, एक करवट से डर जाते थे।

देश के हित में मरने वाले, भरे पड़े हैं मोदी जी।
तुम निर्णय लो बेखटके, हम साथ खड़े हैं मोदी जी।


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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