प्रेम वियोग (राजस्थानी भाषा)

साँची साँची कहु बात,म्हणे घणी आवे याद,
दूर म्हारी नजरो से ,जद भी तू जावे स,

मन म्हारो लागे नही,नैन नींद आवे नही,
हिवड़ो धड़क रह्यो,मन घबराबे स,

सोचता रहु में थाणे,कोण घडी तक जाणे,
ओलू अब देख म्हणे,फिर भिरमावे स

कर वही लागे ठीक,सुपने में मत दीख,
रात घणी मोहे क्यों तू,पागल बनावे स ।।


~नवीन श्रोत्रिय”उत्कर्ष”

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