बचपन

बचपन,
सुकोमल,
स्वच्छंद,
हठत्रयी में एक,
संभावनाएँ अनेक,
जननी-जनक का
दुलार,
जीवन रूपी वटवृक्ष
का अंकुर,
व्यष्टि समष्टि राष्ट्र का
भविष्य,
सृष्टि का प्रवाह,
ईश रूप, वाह
सबका शाह,
मानव जाति
का अस्तित्व,
संरक्ष्य, संपोष्य,
जिज्ञासा का
आरंभ,
है ।।


~राज वीर सिंह

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