माँ-बाप

घोर अपराध किया,माँ-बाप को छोड़ दिया,
तेरी खातिर जिसने,खाना नही खाया था ।

मांगी थी हज़ार दुआ,तब कहि  पूरा हुआ,
सपना बेटा पा ने का,पलको सजाया था ।

पाल पोष बड़ा किया,पैरो पर खड़ा किया,
आज  तूने  नाम  देख,कैसा चमकाया है ।

वेद  शास्त्र  यही  बोले,दर  दर  मत  डोले,
माँ-बाप के रूप में ही,प्रभु को बताया है ।


~नवीन श्रोत्रिय”उत्कर्ष”

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