मेरी भी अरदास अलग है

मेरी भी अरदास अलग है
दोनों का एहसास अलग है,
तेरी-मेरी प्यास अलग है।
तू अजीज है रब का, लेकिन
मेरी भी अरदास अलग है।

एक हवा में उड़ती-फिरती,
हम दोनों की साँस अलग है।
एक रंग और रूप हमारा,
खाकें होतीं लाश अलग हैं।


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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