विकास


विकास जैसा कि शाब्दिक अर्थ है मान मर्यादा धन दौलत जमीन, घर परिवार, देश की प्रतिष्ठा, शक्ति, अस्त्र शस्त्र आदि की वृद्धि होना विकास है। 

हमारे देश में बहुत से राज्य, जिले, तहसील, गांव ऐसे थे, और आज भी अपवाद स्वरूप हैं भी जिनका विकास नहीं हुआ। देश के संविधान ,कानून, प्रशासन ने बहुत प्रयास किये, लगभग सभी क्षेत्रों को विकास की राह दिखाई, विकास की ओर ले गए, परंतु आज भी, संवेदनशील क्षेत्रों में, पिछड़े क्षेत्रों में, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में विकास नहीं हुआ है।

विकास से संबंधित योजनाओं, संसाधनो का सही उपयोग, सही मार्गदर्शन नहीं हो पाया जिसके परिणामस्वरूप आज भी हम भारत देश को पूर्ण रूप से विकासशील देश नहीं कह सकते। शहरी अंचलों का विकास तो हो गया है, परंतु आज भी कई ग्रामीण अंचलों में विकास बहुत दूर है।

आर्थिक विकास को देखें तो, अर्थव्यवस्था के आधार पर मंहगाई में काफी विकास हुआ है, आज से दस साल पहले जो साग सब्जी ,दाल ,तेल ,घरेलू वस्तुओं ,डीजल पेट्रोल के दाम थे ,पहले की तुलना में काफी विकास हुआ है।

पहले हम 100 रूपये में सप्ताह भर की सब्जी खरीद लेते थे, अब एक दिन की सब्जी आती है। पहले 150 रुपये की दाल 5 किलो आती थी, अब एक किलो आती है। पहले ईंधन की वस्तुएं आज की आधी कीमत में थीं आज दुगुनी हैं। विकास तो हुआ है।

शहरीकरण के चक्कर में जंगलों का नाश और आधुनिकता का विकास हुआ है। पर्यावरण पहले से अधिक प्रदूषित हुआ है, अर्थात पर्यावरण प्रदूषण में विकास हुआ है।

पहले रिश्वतखोरी कम थी, अब उसमें भी विकास हुआ है।पहले कालाबाजारी कम थी अब उसमें भी विकास हुआ है। पहले सड़क तो कम थीं पर जो बनती थीं दस साल चलती थीं, उनमें अच्छी किस्म का डामर और अन्य सामग्री का उपयोग होता था, धीरे-धीरे उखड़ती थीं, परंतु अब सड़कों के उखड़ने की तेजी में विकास हुआ है, साल भर के अंदर उखड़ जाती हैं,

पहले किसानों का कर्ज भी माफ हो जाता था, यदि फसलों की नुकसानी हुई है, यदि सूखा पाला पड़ा है तो, अब तो किसानों को नयी नयी स्कीम देकर कर्ज दिया जाता है बैंकों से, फिर वसूली के नोटिस और कर्ज न चुकाने पर जेल भी हो जाती है, बिजली के बिल में भी पर्याप्त विकास हुआ है।

पहले स्कूल के शिक्षक सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का कार्य करते थे, अब उनके कार्यों में इतना विकास हुआ है कि वो पढाई के अतिरिक्त अन्य कार्यों को बखूबी निभा पाते हैं। सामजिक कार्यो का, दायित्व, उनके कंधे डाल दिया गया है, बढि़या विकास हुआ है।

पहले सरकारी विद्यालयों के शिक्षक होनहार होते थे, अब आरक्षण का विकास पर्याप्त हो गया है जिससे प्राईवेट विद्यालयों का विकास प्रचुरता से बरसाती मेंढकोँ जैसे हर गली मोहल्ले में हो गया है।

इस विकास को सलाम एक आम नागरिक का।

लेखन —- आशीष पाण्डेय जिद्दी

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