वैदिक जीवन

वैदिक जीवन था सरल ,
एक सुखद अहसास ।
आपाधापी में हुये ,
सबसे अधिक निराश ।।

भौतिकता के साथ में ,
हुये नये अनुबंध ।
स्वार्थ पर बनने लगे ,
जीवन के संबंध ।।

ज्ञान दीप गुरु से जले ,
ख़त्म सब तम अज्ञान ।
संस्कार के साथ में ,
थी नूतन पहचान ।।

जीवन में परमार्थ का ,
सदा रहा है जोर ।
मर्यादा को भूलकर ,
आज मचाते शोर ।।


~डॉ – अरुण श्रीवास्तव

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