शुभ नहीं होता

बड़ों के बीच में बच्चों का भाषण शुभ नहीं होता।
जमाई को मिले बेटे का राशन शुभ नहीं होता।
कदापि शुभ नहीं होता, बहु बंधक सी रह जाए,
विवाहित पुत्री का पीहर में शासन शुभ नहीं होता।

अतिथि को दिया भूमि पे आसन शुभ नहीं होता।
जूठे अन्न से कभी अन्न-प्राशन शुभ नहीं होता।
कदाचित् शुभ नहीं होता पड़ोसी घर में चुटकी लें,
घर के क्लेश का जग में प्रकाशन शुभ नहीं होता।

कि पौ फटते पति से हो विकर्षण शुभ नहीं होता।
पति का पर-स्त्री से हो आकर्षण शुभ नहीं होता।
कदापि शुभ नहीं होता झगड़ना घर की चौखट पे,
कभी ससुराल में शक्ति-प्रदर्शन शुभ नहीं होता।

बच्चों से बुरा बर्त्ताव करना शुभ नहीं होता,
पिता से पैसों का हिसाब करना शुभ नहीं होता।
कदापि शुभ नहीं होता सुनो, आंगन में मल धोना,
चौखट पे कभी पेशाब करना शुभ नहीं होता।

जरा सी बात पर ही रूठ जाना शुभ नहीं होता,
गलतफहमी में रिश्ते टूट जाना शुभ नहीं होता।
सभी को साथ ले चलना ही है कर्त्तव्य मुखिया का,
किसी का पीठ-पीछे छूट जाना शुभ नहीं होता।


~पं० सुमित शर्मा “पीयूष”

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