दैनिक श्रेष्ठ रचना दिनांक 20.02.2018 (विश्वेश्वर शास्त्री)

*”आल्हा छंद “*
१६,१५ पर यति ३१ मात्रायें अंत में गुरु लघु

आँचल \ वीरांगना

भारत माता के आँचल में,
उपजे धीर वीर बलवान |
शाखा गाऊँ उन वीरों का,
भैया सुनो लगा कर कान |
भईं मरदानी लक्ष्मी बाई,
कीरत जाने सकल जहान |
वन वीरांगना रानी जू ने,
काट लये वीरन के कान |
मार मार के आँगरेजन खें,
भैया कर दव बंटाधार |
आँचल बाँध लओ बेटा खें,
कर जननी की जै जै कार |
कूद पडी दुश्मन के दल में,
कर डारो भीषण संहार |
छक्का छुडा दये दुश्मन के,
गौरा खावें हाहाकार |
दऊ हाथन सें चला शिरोही,
गर दये लोथन केर कगार |
नमन करत वीरांगना जू को,
जै जै करवें सब नर नार |
“विश्वेश्वर” फिर प्रकटो बाई,
भारत माता करत पुकार !!

***

कवि विश्वेश्वर शास्त्री !!

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