हृदय के पन्ने पर

मेरे हृदय के पन्ने पर
लाखो अहसास मचलते हैं
दर्द ,खुशी,गम ,सभी के
अपने रंग है
शब्दों के कारीगरी में जब ढलते हैं तो,
कविता, गजल, नज्म, छनद,
बन पन्नो पर बिखरते है,
छूपा के रखा था ,मखमली हरी दूब पर ओस की तरह
तेरे “प्यार”को
जब तन्हा होती तो सुखे से दिल मे तुम्हारा प्यार
हरियाली बन छा जाता,
सपने मे भी उस हरियाली के संग मै भी तुम्हे साकार कर “हरी ” हो जाती ,
तपन विरह की मंद हो जाती,
पा लेती हुं कुछ पल तेरे प्यार कि हरियाली को
सपना ही सही
क्षण भर ही सही अपना लगता है ,मुझसे ये क्षण कोई छीन तो नहीं सकता
सदैव मेरे मन के पन्नो पर प्यार तुम्हारा “हरियाली”
बन छाया रहेगा ,
तब तक तुम मेरे भावो के सरिता मे बहते रहोगे
अविरल !


~अनीता मिश्रा

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