सम्मान करो उस जननी का

नारी हुं नारी का सम्मान चाहती हुं, कोरी बातो से नहीं हृदय से मान चाहती हुं l

जीवन दिया प्रेम दिया एक नारी ने कितने रुपो में हे
नर तुझे मनाया ,नियती देखो नर ने ही उसको भरी सभा में नचायाll

देवी की पुजा करते हो,मुरत में इतनी आस्था,जीते जी जलाते हो ये कैसी व्यवस्था l

नारी बिना क्या नर संभव है , कोख में पालती अमृतसी दुग्ध पान कराती,
आंचल तले सोते हो ,फिर भी उसकी मर्यादा खोते हो l

सम्मान करो उस जननी का जिससे जीवन पाते हो l

देगी ना जन्म तुन्हे तो क्या धरा पर आओगे ?

मत सताओ इतना गंगा सा पवित्र मन है तन है देवी सा l
चरणो पर शिश झुकाओ मां के बन जाओ श्रवन सा l
नारी से है आदि-अंत नारी जीवन का है सार ,

अबला नहीं वो सबला है ,दुष्ट का करती संहार शक्ति-स्वरुपा कहता संसार l
अनीता मिश्रा””सिद्धी””

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