पाखण्ड हुआ खण्ड-खण्ड

रचयिता- नमन जैन अद्वितीय, शामली (उ० प्र०)

हुआ पतन है संस्कारों का क्रोध बहुत अब आता है।
पाखण्डी को देख देख कर धर्म खड़ा शर्माता है।
बेच चुके निज आन-बान को धर्म बेचने वाले हैं।
गन्दी मछली के कारण अब नीरकुंड भी नाले है।
हम तो समझा करते थे कि धर्म बचाने आयेंगे।
पता नही आभास नही था इसे बेचकर खायेंगे।
साधु उनको कहते हैं जो देश धर्म का मान करें।
साधु उनको कहते हैं जो संस्कृति का सम्मान करें।
साधु उनको कहते हैं जो नारी लाज बचाते हैं।
साधु उनको कहते हैं जो रक्षक भी बन जाते हैं।

साधु उनको कहते हैं जो लोभ मोह सब छोड़ चुके।
दुनियादारी छोड छाडकर हर बंधन को तोड़ चुके।
पर ये कैसा साधु जन्मा भारत भू की माटी पर।
इसके कृत्य देख-देखकर शर्म लगी परिपाटी पर।
शर्मिंदा है धर्म सनातन शर्मिंदा हर हिन्दू है।
श्वेत पृष्ठ के ऊपर लगता जैसा काला बिन्दू है।
पहले आशाराम गया था रामवृक्ष कुछ जाते हैं।
रामपाल और रामरहीम से खुद को राम बताते हैं।
नही बराबर चरण धूलि के राम नाम बदनाम किया।
राम नाम की शरण पकड़कर ओछा गंदा काम किया।

राम सदा ही धर्म सनातन मर्यादा के पोषक थे।
राम हमारे संस्कार और संस्कृति के उद्घोषक थे।
दुष्ट अधर्मी हुए धरा पर उनके वो संहारक थे।
निर्धन की पूँजी होते थे असहाय के तारक थे।
ये साधु जो राम नाम का चोला पहने फिरते हैं।
राम तो छोड़ो रावण भी इनके पापों से डरते हैं।
रेप करें जो करते अगवा शोषण के अपराधी हैं।
हथियारों का रखें जखीरा आतंकी उन्मादी हैं।
हुआ फैसला तीन तलाक का मुस्लिम ने अपनाया था।
न्यायालय का निर्णय था पूरे भारत को भाया था।

इक दुष्कर्मी की खातिर क्यों इतना शोर मचाते हो।
न्यायालय ने न्याय किया है क्यों इसको झुठलाते हो।
वो ही लड़की अगर तुम्हारी बेटी बहन हुई होती।
तब भी क्या ये भीड़ सड़क पर वाहन फूँक रही होती।
ये भीड़ नही हटती लेकिन तब तुम तो साथ नही होते।
बर्बादी के आलम पर तुम सागर भर आँसू रोते।
कवि नमन आह्वान करे यही सच्चाई अपनाओ अब।
नही अगर ये कर सकते तो बाबा ही बन जाओ अब।
लेकिन इतना याद रहे विश्वास नही टिक पायेगा।
बाबा ऐसे रहे अगर हर आतंकी कहलायेगा।

नमन जैन अद्वितीय
३०/०८/२०१७

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